फर्जीवाड़े में आगरा यूनिवर्सिटी के दो पूर्व अधिकारी को वारंट

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Just abhi…..अब मध्यप्रदेश में हुईं लेखपाल भर्तियों में विवि की फर्जी मार्कशीट और सत्यापन का मामला खुला है। इस मामले में एमपी की इंदौर कोर्ट ने तीन कर्मचारियों के खिलाफ वारंट जारी किए हैं। इनमें दो अधिकारियों के साथ एक महिला कर्मचारी भी शामिल है।

मामला पांच साल पुराना बताया जाता है। तब मध्य प्रदेश में लेखपाल के पदों पर भर्तियों को आवेदन मांगे गए थे। आगरा विवि की मार्कशीट के जरिए भी कइयों ने आवेदन किए। इनमें से कुछ को नौकरी भी मिल गई। मध्य प्रदेश सरकार ने आगरा विवि से इनका सत्यापन कराया था। सूत्रों के मुताबिक विवि से भी इन लोगों की सत्यापन रिपोर्ट भेज दी गई। जबकि यह मामले फर्जी थे। कॉलेजों के रिकार्ड से इसकी तस्दीक की गई है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में इंदौर कोर्ट ने सेवानिवृत के बाद विवि में काम कर रहे एआर रामव्रत राम, पूर्व में कुलसचिव पद पर कार्य कर चुके डीआर प्रभाष द्विवेदी और टेक्नकल सेल में कार्यरत रहीं सर्वजीत कौर के नाम वारंट जारी किए हैं। बता दें कि प्रभाष द्विवेदी फिलहाल संपूर्णानंद विवि वाराणसी में कुलसचिव हैं। आठ फरवरी को तीनों को इंदौर की अदालत में पेश होना है। विवि के लीगल सेल में भी इसकी प्रति आई बताते हैं। पीआरओ डा. गिरजाशंकर शर्मा ने बताया कि इस तरह की जानकारी मिली है। विवि कानून का सम्मान करते हुए इसके पालन में सहयोग करेगा।

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